मरकज़ निज़ामुद्दीन क्या है और वहां क्या होता है और मौलाना साद कौन है जानिए पूरी डिटेल?
मरकज़ निज़ामुद्दीन क्या है?
मरकज़ निज़ामुद्दीन बंगले वाली मस्जिद दक्षिण दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन वेस्ट में स्थित हे और पूरी दुनिया के मुसलमान इसको निज़ामुद्दीन मरकज़ के नाम से जानते है। पूरी दुनिया में मरकज निजामुद्दीन के लगभग 40 करोड़ अनुयायी (Followers) है।
मरकज़ निजामुद्दीन की स्थापना हज़रत जी मौलाना मुहम्मद इलियास कांधलवी रह. ने 1927 में की थी। निजामुद्दीन मरकज़ पूरी दुनिया का तब्लीगी जमात का सेंटर है यानि हेड क्वार्टर है जहाँ से पूरी दुनिया में तब्लीग़ का काम किया जाता है। पूरी दुनिया में तब्लीग़ी जमात इस मरकज़ की गाइडलाइन्स पर काम करती है। मरकज निजामुद्दीन को समझने के लिए पहले हमें तब्लीगी जमात को समझना होगा।
तब्लीग़ी जमात किसी भी नॉन मुस्लिम का धरम परिवर्तन नहीं करती।
तब्लीगी जमात एक ऐसा समूह है जो मुसलमानों को अमन ( शान्ति ) की तरफ बुलाते हे यानि उस तरीके की मेहनत की तरफ बुलाते हे जो खुद पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल.) किया करते थे।
तब्लीग़ी जमात का काम मुसलमानो को बेहतर धार्मिक मुस्लिम बनाना है। ये सिखाती हे की नमाज़ कैसे पढ़नी चाहिए, ईश्वर का नाम कैसे जपना चाहिए। इस पर इनका फोकस रहता है
तब्लीगी जमात एक ऐसा समूह है जो मुसलमानों को अमन ( शान्ति ) की तरफ बुलाते हे यानि उस तरीके की मेहनत की तरफ बुलाते हे जो खुद पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल.) किया करते थे।
तब्लीग़ी जमात का काम मुसलमानो को बेहतर धार्मिक मुस्लिम बनाना है। ये सिखाती हे की नमाज़ कैसे पढ़नी चाहिए, ईश्वर का नाम कैसे जपना चाहिए। इस पर इनका फोकस रहता है
तब्लीग़ी जमात पूरी दुनिया में शांति और एक ईश्वरवाद का सन्देश देती है। तब्लीग़ी जमात का काम पूरी दुनिया में लोगो को अच्छाई की तरफ बुलाना और बुराई से रोकना है। और इसका मक़सद दुनिया से झूट, धोखा धड़ी, बलात्कार आदि बुराईयों को ख़तम करना है लेकिन वो भी बिना किसी हिंसा और फ़ोर्स के।
दरअसल इनकी सोच ये हे की इंसान बुरा नहीं होता बल्कि उसकी सोच और उसके करम बुरे होते हे और अगर इंसान पर मेहनत करके उसकी सोच ठीक करदी जाये तो उसके कर्म भी अच्छे हो जाते है और ऐसे लोगों को फिर से नयी जिन्दगी जीने का मौका मिलता है। ये इंसानो को अल्लाह से डरने वाला बनाते है ताकि ये अल्लाह से डर कर सब बुरे काम छोड़दे और ये लोग बताते हे की इन्सान जब अच्छे क्रम करता हुआ मरेगा तो ज़न्नत में दाखिल होगा यानि स्वर्ग में दाखिल होगा। पता नहीं कितने शराबी जुअवारी अय्याश लोग यहाँ आकर सुधर गए। जी हाँ इसलिए इनको समाज सुधारक भी कहा जाता है।
अब जानिए हजरत जी मौलाना साद कौन है?
मौलाना साद देश के कानून का पालन करने को, तब्लीग़ी जमात का प्राथमिक नियम बताते है। उसके लिए ऊपर वीडियो भी दिया हे जिसमे उन्होंने डॉक्टर्स और सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन्स का पालन करने को कहा है।
अब जानिए रोजाना निजामुद्दीन में क्या होता है।
जितनी भी जमाते विदेश से इंडिया आती हे तब्लीग़ का काम सीखने वो निजामुद्दीन मरकज़ आकर रूकती हे, दिशा निर्देश समझती है फिर उनके साथ इंडिया के किसी तब्लीग़ के कोच को जोड़ कर इंडिया के ही स्टेट में काम की प्रक्टिस कराई जाती हे। जमाते 40 दिन, 2 महीना या 4 महीना इस हिसाब से यहाँ आती है तब तक इंडिया के अलग़ अलग स्टेट में वो काम करते हे जब उनका टाइम पूरा हो जाता है तो वो वापस फिर निजामुद्दीन मरकज़ आती है और यहाँ से अपने अपने टाइम टेबल से जिसका जब वीज़ा समाप्त होता हे उस हिसाब से अपने देश को वापस हो जाते हे। और अपने देश जाकर इसी मेहनत को करते है।
बिलकुल इसी तरह इंडिया की अपनी जमाते अलग अलग स्टेट से यहाँ आती हे 1 या 2 दिन यहाँ तब्लीग़ के दिशा निर्देश सीखती है और उनको जहाँ - जहाँ जरुरत होती हे मरकज़ निज़ामुद्दीन के मशवरे से किसी भी राज्य में उनको तब्लीग़ के काम के लिए भेजा जाता है। अब क्युकी ये पूरी दुनिया का सेंटर है और सब जमाते यहाँ से होकर आती/जाती रहती है इसलिए रोजाना यहाँ 1500 से 2000 लोग हमेशा यहाँ रहता है। इतने लोगो के रहने और खाने का इंतेज़ाम भी मरकज़ निजामुद्दीन में होता हे रोजाना।
सोचने की बात ये है की अगर तब्लीगी जमात या मरकज़ निजामुद्दीन Anti-National या Anti-Hindu होती तो 100 साल से भारत के दिल यानि राजधानी दिल्ली में ये संचालित रह सकती थी ?
सोचने की बात ये है की अगर तब्लीगी जमात या मरकज़ निजामुद्दीन Anti-National या Anti-Hindu होती तो 100 साल से भारत के दिल यानि राजधानी दिल्ली में ये संचालित रह सकती थी ?
इंदिरा गांधी के दौर में निजामुद्दीन मरकज की जांच का वाक़्या :-
इंदिरा गांधी जी के दौर में उन्होंने जांच एजेंसी को काम सौंपा था की यहाँ क्या एक्टिविटी होती हे,
यहाँ से लोग जमात बना कर जाते हे देश और विदेश में 40 दिन की, 4 महीने की, तो ये करते क्या हे ?
तो जाँच एजेंसी ने जाँच की और निष्कर्ष निकल कर बताया की हमने बहुत गौर से इनको सुन लिया, देख लिया, बात कर क समझ भी लिया, इनसे राष्ट्र को कोई खतरा नहीं हे, क्योंकि ये इस दुनिया की बात ही नहीं कर रहे, ये तो जमीन से नीचे और आसमान से ऊपर की बात करते है। ये तो कहते हे अगर खुदा के हुकम पर जिंदगी नहीं गुजारी तो तुमको मरने के बाद कबर में सांप बिच्छू काट खायगे। और जन्नत ( स्वर्ग ) / जहन्नम ( नरक ) में क्या क्या होगा इसकी बात करते है।
इंदिरा गांधी जी के दौर में उन्होंने जांच एजेंसी को काम सौंपा था की यहाँ क्या एक्टिविटी होती हे,
यहाँ से लोग जमात बना कर जाते हे देश और विदेश में 40 दिन की, 4 महीने की, तो ये करते क्या हे ?
तो जाँच एजेंसी ने जाँच की और निष्कर्ष निकल कर बताया की हमने बहुत गौर से इनको सुन लिया, देख लिया, बात कर क समझ भी लिया, इनसे राष्ट्र को कोई खतरा नहीं हे, क्योंकि ये इस दुनिया की बात ही नहीं कर रहे, ये तो जमीन से नीचे और आसमान से ऊपर की बात करते है। ये तो कहते हे अगर खुदा के हुकम पर जिंदगी नहीं गुजारी तो तुमको मरने के बाद कबर में सांप बिच्छू काट खायगे। और जन्नत ( स्वर्ग ) / जहन्नम ( नरक ) में क्या क्या होगा इसकी बात करते है।
अब न्यूज़ चैनल वाले लोगों का आरोप है के सेमीनार क्यों किया, और ऐसे वक़्त में इतने लोग जमा क्यों किये ?
अब जैसा कि ऊपर क्लियर हो गया की वह मौज़ूद लोगों को बुलाया नहीं गया थे, बल्कि 1500 - 2000 लोग वँहा हर समय रहते ही है, क्युकी ये पूरी दुनिया का सेंटर है और सब जमाते यहाँ से होकर जाती हे।
19 मार्च शाम को क्योकि मोदी जी द्वारा जनता कर्फ्यू का एलान किया गया तो 20-21 मार्च को भी बहुत मजमा निजामुद्दीन मरकज़ से रवाना किया गया। अब क्योकि 22 मार्च 2020 को सिर्फ एक दिन के जनता कर्फ्यू की घोषणा हमारे मान्नींय प्रधानमंत्री जी ने पूरे देश में की थी उसका पालन निजामुद्दीन और हर तब्लीग़ी जमात ने किया।
अब जैसे ही 22 मार्च की शाम आयी और दिल्ली सरकार ने लॉकडाउन का एलान कर दिया तो 23 और 24 मार्च को जितनी जमाते विदेश की या दूसरे राज्यों की दिल्ली के इलाको में काम कर रही थी उनका पलायन हुआ मरकज़ निजामुद्दीन की तरफ क्यकि इनको कोई और रुकने का स्थान नज़र नहीं आया। तो जो मज़मा कम हुआ उसमे फिर बढ़ोतरी हो गयी।
निजामुद्दीन प्रवक्ता जनाब अशरफ और लीगल एडवाइजर के मुताबिक, अब ऐसे हालत में क्युकी लॉकडाउन अचानक 24 मार्च को पूरा भारत, मोदी जी की आज्ञा से लोक डाउन कर दिया गया तो मरकज़ को संभलने का भी मौका नहीं मिला और सब बस, ट्रैन, हवाई जहाज भी बंद हो गये, फिर भी जितना हो सका निजामुद्दीन के कार्यालय ने प्रशासन से अपील की के बस ट्रैन तो बंद है अगर प्रशासन परमिशन या पास प्रदान करदे तो मरकज़ के लोग अपने अपने राज्यों को प्राइवेट सवारियों से रवाना हो जाए।
बस, ड्राइवर, गाड़ियां इन सब का इंतजाम मरकज़ निजामुद्दीन के कार्यकर्ता लोगो ने किया और इनकी लिस्ट स्थानीय प्रशासन को दी, यहाँ तक की जिला प्रशासन को भी सोंपी कि वो परमिशन / पास का इंतजाम कराए, लेकिन फिर भी किसी कारणवश नहीं हो पाया क्युकी प्रशासन ने भी असमर्थता जाहिर कर दी थी। और जैसे कि 24 मार्च को माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा था की आपके द्वार पर लक्षमण रेखा खींच दी गई हे, तो जो जँहा हे वहीँ रहे।
निजामुद्दीन प्रवक्ता जनाब अशरफ और लीगल एडवाइजर के मुताबिक, अब ऐसे हालत में क्युकी लॉकडाउन अचानक 24 मार्च को पूरा भारत, मोदी जी की आज्ञा से लोक डाउन कर दिया गया तो मरकज़ को संभलने का भी मौका नहीं मिला और सब बस, ट्रैन, हवाई जहाज भी बंद हो गये, फिर भी जितना हो सका निजामुद्दीन के कार्यालय ने प्रशासन से अपील की के बस ट्रैन तो बंद है अगर प्रशासन परमिशन या पास प्रदान करदे तो मरकज़ के लोग अपने अपने राज्यों को प्राइवेट सवारियों से रवाना हो जाए।
बस, ड्राइवर, गाड़ियां इन सब का इंतजाम मरकज़ निजामुद्दीन के कार्यकर्ता लोगो ने किया और इनकी लिस्ट स्थानीय प्रशासन को दी, यहाँ तक की जिला प्रशासन को भी सोंपी कि वो परमिशन / पास का इंतजाम कराए, लेकिन फिर भी किसी कारणवश नहीं हो पाया क्युकी प्रशासन ने भी असमर्थता जाहिर कर दी थी। और जैसे कि 24 मार्च को माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा था की आपके द्वार पर लक्षमण रेखा खींच दी गई हे, तो जो जँहा हे वहीँ रहे।
तो बराबर प्रशासन के संपर्क में रहते हुए मरकज़ निजामुद्दीन अपने यहाँ स्तिथ स्वदेशी और विदेशी महमानो को रखने पर विवश रहा और उनको ऊपर नीचे 5 मंजिल पर जितना दूर दूर हो सकता था ठहराया भी और उनके खाने पीने का प्रबंध भी किया।
ऐसे वक़्त में यू कहे के जिस माहौल में मकान मालिकों ने किरायेदारों को निकाल दिया और फैक्टरी मालिकों ने कर्मचारियों को निकाल दिया।
ऐसी संकट की घड़ी में मरकज़ निजामुद्दीन ने तमाम स्वदेशी और विदेशी महमानो को मानवता दिखाते हुए अपने यहाँ रहने और खाने का आश्रय दिया।
या यूँ भी कहे की मरकज़ निजामुद्दीन ने इंसानियत दिखाते हुए 1500 से 2000 लोगो को बाकि हज़ारो बेघर मजदूरों की तरह सड़को पर भूखे रहकर रात गुजारने से बचा लिया।
अब ये भलाई करना भी कुछ बिकाऊ मीडिया ने अपराध करार दे दिया।
तो अब में आप पर छोड़ता हू के एक इंसान होने के नाते आप खुद फैसला करे क्या सही क्या गलत, और कमेंट में अपनी राय जरूर दे।




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